गुमला

जलमीनार निर्माण में अतिक्रमण बना बाधा, 17 मई तक जगह खाली नहीं हुई तो टावर चौक पर धरना

गुमला नगर परिषद के बाजार टांड़ में प्रस्तावित जलमीनार निर्माण को लेकर अब जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है. वार्ड संख्या सात के पार्षद अनिल कुमार यादव ने नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि 17 मई तक प्रस्तावित स्थल को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो सभी जनप्रतिनिधि टावर चौक स्थित शहीद चौक पर धरना-प्रदर्शन करेंगे. वार्ड पार्षद अनिल कुमार यादव ने अपने पत्र में कहा है कि विश्व बैंक की सहायता से नगर परिषद क्षेत्र में जलापूर्ति योजना के तहत बाजार टांड़ में एक नई पानी टंकी का निर्माण प्रस्तावित है. इसके लिए चयनित स्थल का पूर्व में नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षदों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण भी किया था. निरीक्षण के दौरान पाया गया कि उक्त स्थल पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से गुमटी, कबाड़ी और अन्य व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं. पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद कार्यालय द्वारा कई बार नोटिस जारी किये जाने के बावजूद अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है.

यहां तक कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने भी स्थल पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया. लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी. अनिल यादव ने कहा कि 13 मई 2026 को हुई बोर्ड बैठक में भी सभी वार्ड पार्षदों ने एकमत से प्रस्ताव पारित कर जल्द से जल्द स्थल को खाली कराने की मांग की थी. इसके बावजूद नगर परिषद प्रशासन का रवैया बेहद सुस्त बना हुआ है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 17 मई तक कार्रवाई नहीं हुई, तो बाध्य होकर सभी जनप्रतिनिधि टावर चौक स्थित शहीद चौक पर धरना देंगे. अब इस मुद्दे को लेकर नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. शहर में चर्चा है कि करोड़ों की जलापूर्ति योजना अतिक्रमण और प्रशासनिक ढिलाई के कारण अटक सकती है. वहीं लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो शहर की बहुप्रतीक्षित जल योजना पर भी असर पड़ सकता है.

जलमीनार नहीं बनने से छह हजार आबादी प्रभावित

गुमला शहर में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि से जलापूर्ति योजना फेज-टू पर काम होना है. लेकिन बाजार टाड़ में प्रस्तावित जलमीनार का निर्माण तीन मुर्गी व कबाड़ी दुकानों के कारण नहीं हो रहा है. जलमीनार नहीं बनने से शहर की एक बड़ी आबादी का हिस्सा पीने के पानी से वंचित है. करीब छह हजार परिवार को अभी पानी नहीं मिल रहा है. अगर जलमीनार बन जाता है तो छह हजार परिवार को राहत मिलेगी.

कार्यपालक पदाधिकारी रूचि नहीं दिखा रहे हैं

गुमला शहर में जलापूर्ति योजना फेज टू पर काम शुरू हो. इसपर नगर परिषद के पदाधिकारी रूचि नहीं ले रहा है. यही वजह है. अबतक जलमीनार निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है. साथ ही हर महीने किराये पर कृषि बाजार की भूमि को मुर्गी व कबाड़ी दुकान को दे दिया गया है. किराये पर भूमि दिये जाने के मामले में नगर परिषद की भूमिका पर भी सवाल खड़ा हो गया है.

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