शिबू सोरेन ने करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं को आवाज दी : रोहित भगत
झामुमो के पूर्व गुमला जिला युवा अध्यक्ष रोहित भगत ने कहा है कि देश के महान जननायक, झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान मिलना झारखंड की जनता, आदिवासी समाज और अलग राज्य आंदोलन से जुड़े लाखों लोगों के संघर्ष का सम्मान है. दिशोम गुरु का संपूर्ण जीवन जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा. नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका संघर्ष झारखंड राज्य निर्माण तक पहुंचा और उन्होंने अपने अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता तथा जनसमर्पण के बल पर करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं को आवाज दी. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में गुरुजी की धर्मपत्नी रूपी सोरेन द्वारा यह सम्मान ग्रहण किया जाना पूरे झारखंड के लिए गर्व और भावुक कर देने वाला क्षण है. यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस विचार, आंदोलन और संघर्ष की विरासत का सम्मान है. जिसने झारखंड को उसकी अलग पहचान दिलायी.
पद्मभूषण सम्मान से राष्ट्र ने गुरुजी के ऐतिहासिक योगदान को स्वीकार किया है. लेकिन यह गौरव और भी बड़ा होता यदि देश उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करता. गुरुजी का सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय योगदान इतना व्यापक और ऐतिहासिक है कि वे भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के वास्तविक हकदार हैं. शिबू सोरेन ने केवल झारखंड राज्य निर्माण का नेतृत्व नहीं किया. बल्कि आदिवासी समाज, किसानों, मजदूरों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया. उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके विचार सदैव समाज को दिशा देते रहेंगे.
