गुमला

बारिश ने छीनी गरीब परिवार की छत, कच्चा मकान ढहा; खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर

(चैनपुर से अंकित कुमार पासवान की रिपोर्ट)
चैनपुर प्रखंड क्षेत्र में लगातार हो रही मानसूनी मूसलाधार बारिश अब गरीबों के लिए आफत बन चुकी है. लगातार बरस रहे मेघों के बीच चैनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रेमनगर प्रोजेक्ट स्कूल के समीप में प्रकृति का ऐसा तांडव देखने को मिला जिसने एक गरीब परिवार से उसका सिर छुपाने का आशियाना ही छीन लिया. मूसलाधार बारिश के चलते एक कच्चा मकान भरभरा कर ढह गया जिससे पीड़ित परिवार अब खुले आसमान के नीचे जीने को विवश हो गया है.

मिली जानकारी के अनुसार अहले सुबह करीब 3 बजे लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच चैनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रेमनगर प्रोजेक्ट स्कूल के समीप एक भीषण हादसा हुआ. स्व. ज्वाकिम एक्का के पुत्र जेम्स एक्का का मिट्टी का कच्चा मकान अचानक पूरी तरह से ढहकर मलबे में तब्दील हो गया. गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय परिवार के सभी सदस्य घर के अंदर ही मौजूद थे लेकिन किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से चोट लगने की सूचना नहीं है. समय रहते बड़ा हादसा टल गया वरना जानमाल का भारी नुकसान हो सकता था.

अनाज और गृहस्थी का सारा सामान मलबे में दफन

मकान अचानक गिरने से घर के अंदर रखा खाने-पीने का अनाज, कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी गृहस्थी का सामान पूरी तरह मलबे में दबकर नष्ट हो गया. अचानक आए इस प्राकृतिक संकट ने गरीब जेम्स एक्का के परिवार के सामने विकट समस्या खड़ी कर दी है. लगातार हो रही बारिश के बीच इस परिवार के पास अब सिर छुपाने के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है.

मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि, बंधाया ढांढस

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सुगबुगाहट तेज हुई. चैनपुर की मुखिया शोभा देवी और जिला परिषद सदस्य तत्काल मौके पर पहुंचे. दोनों जनप्रतनिधियों ने मलबे में तब्दील हो चुके मकान का बारीकी से जायजा लिया और पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिया. उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों को आश्वस्त किया कि अंचल प्रशासन से बात कर आपदा राहत कोष के तहत पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सहायता राशि जल्द से जल्द दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा. पीड़ित गृहस्वामी जेम्स एक्का ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस भीषण बरसात के मौसम में उनके परिवार को तुरंत तिरपाल (पॉलीथिन) उपलब्ध कराया जाए ताकि वे किसी तरह सिर छुपा सकें. इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता की मांग की है ताकि इस संकट की घड़ी से उबरा जा सके. लगातार बारिश के बीच गरीबों के आशियाने उजड़ने की इन घटनाओं ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है, और अब देखना यह होगा कि पीड़ित परिवार को कब तक वास्तविक राहत मिल पाती है.

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