धरोहर

जितेश मिंज ने कहा- झंडा पूजा स्थल का संरक्षण, संवर्धन एवं विकास हो

झंडा पूजा स्थल समिति के सदस्य जितेश मिंज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गुमला शहर के बीचों-बीच स्थित आदिवासी धार्मिक आस्था के केंद्र झंडा पूजा स्थल के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह स्थल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. स्थानीय पहन करमा खड़िया के अनुसार, इसी स्थल से गुमला के नामकरण का इतिहास जुड़ा हुआ है.

प्राचीन काल में माघ पूर्णिमा से फागुन तक यहां विशाल जतरा (मेला) लगता था, जहां आसपास के गांवों के लोग अपने पुरखों एवं आराध्य देवताओं की सामूहिक पूजा-अर्चना कर झंडा मिलान करते थे. इस मेले में बड़े पैमाने पर गायों का व्यापार होता था, जिसके कारण इसे गौ-मेला भी कहा जाता था. कालांतर में इसी से इस क्षेत्र का नाम गुमला प्रचलित हुआ. जितेश मिंज ने आरोप लगाया कि वर्तमान में इस धार्मिक स्थल की उपेक्षा की जा रही है. नगर परिषद द्वारा पूजा स्थल के समीप कचरा डंप किया जा रहा है, जबकि आसपास के लोग भी वहां कचरा फेंकने और पेशाब करने से स्थल की पवित्रता भंग कर रहे हैं.

उन्होंने जिला परिषद अध्यक्ष शकुंतला उरांव एवं जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर पूजा स्थल के पास कचरा डंपिंग तत्काल बंद कराने, नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने, यहां कचरा फेंकना मना है का सूचना बोर्ड लगाने, निगरानी व्यवस्था स्थापित करने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाये गये तो क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक निकाय की होगी.

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