गुमला

प्रेम प्रसंग में अंधा हुआ पति बना था हैवान, गर्भवती पत्नी और मासूम बेटी की निर्मम हत्या पर मिला उम्रकैद

चार साल पहले गुमला जिले को दहला देने वाले गर्भवती पत्नी और तीन वर्षीय मासूम बेटी की निर्मम दोहरे हत्याकांड मामले में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. एडीजे-1 प्रेम शंकर की अदालत ने आरोपी पति मिथलेश गोप को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

यह मामला वर्ष 2022 के दिसंबर माह का है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया था. पालकोट थाना क्षेत्र के सतखरी गांव निवासी मिथलेश गोप पर आरोप था कि उसने अपनी गर्भवती पत्नी अमीषा देवी और तीन वर्षीय मासूम बेटी सोनाछी कुमारी की बेहद बेरहमी से हत्या कर दी थी. इस मामले में सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक अजय रजक ने अदालत में पैरवी की.

दूसरी महिला के प्रेम में बना खूनी

बताया गया कि आरोपी मिथलेश गोप किसी दूसरी महिला के साथ संबंध में था. इसकी भनक लगने के बाद उसकी पत्नी अमीषा देवी काफी परेशान रहने लगी थी. घरेलू विवाद बढ़ने पर वह अपनी तीन वर्षीय बेटी को लेकर बसिया थाना क्षेत्र के बनाई गांव स्थित मायके चली गई थी. उस समय वह गर्भवती भी थी. परिजनों के अनुसार, मायके में रहने के दौरान आरोपी लगातार पत्नी को वापस बुलाने का दबाव बना रहा था. घटना वाले दिन उसने प्यार और समझौते का झांसा देकर पत्नी को मिलने बुलाया. अमीषा देवी अपनी मासूम बेटी के साथ उसके पास पहुंची, लेकिन उसे क्या पता था कि पति ने मौत का जाल बिछा रखा है.

घूमाने के बहाने नदी किनारे ले गया, फिर खेला खूनी खेल

आरोपी पत्नी और बेटी को बसिया स्थित गुनसेरा नदी के पास घुमाने के बहाने ले गया. सुनसान इलाके में पहुंचते ही उसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं. पहले गर्भवती पत्नी की निर्मम हत्या की गई, फिर तीन साल की मासूम बेटी को भी मौत के घाट उतार दिया. घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी. लोगों के लिए यह यकीन करना मुश्किल था कि एक पिता अपनी ही बेटी को इतनी बेरहमी से मार सकता है. दोहरे हत्याकांड ने जिले में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था.

चार साल बाद मिला इंसाफ

लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. फैसले के बाद एक बार फिर वह दिल दहला देने वाली घटना लोगों की जुबान पर लौट आई. अदालत के फैसले को पीड़ित परिवार ने न्याय की जीत बताया है.

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